Dev Uthani ekadashi puja vidhi, katha and muhurat, देवउठनी एकादशी पूजा विधि, व्रत कथा और शुभ मुहूर्त

Dev Uthani ekadashi puja vidhi, katha and muhurat, देवउठनी एकादशी पूजा विधि, व्रत कथा और शुभ मुहूर्त
देवउठनी एकादशी, व्रत पूजा विधि, महत्व और पौराणिक कथा , Devuthani Ekadashi pooja vidhi, Shubh Muhurth

देवउठनी एकादशी, व्रत पूजा विधि, महत्व और पौराणिक कथा , Devuthani Ekadashi pooja vidhi, Shubh Muhurth

हिंदू धर्म में एकादशी का बहुत महत्व है। हर माह में दो एकादशी आती है। इन सब एकादशियों में देवउठनी या देवोत्थान एकादशी का विशेष महत्व है। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयन एकादशी कहा जाता है तो इसके चार माह बाद कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी होती है। देवउठनी एकादशी का नाम देवोत्थान एकादशी भी है। देवउठनी एकादशी से मंगलिक काम फिर से शुरू होते हैं। इस बार देवोत्थान एकादशी 19 नवंबर के दिन है।

देवोत्थान एकादशी व्रत रखने से मिलता मोक्ष
देवोत्थान एकादशी का व्रत व उपवास करने वाले को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसे बड़ी एकादशी और प्रबोधनी एकादशी भी कहा जाता है। देवउठनी एकादशी के दिन भगवान क्षीरसागर में चार माह के शयन के बाद जागते हैं। इसलिए इस दिन से ही मंगल काम फिर से शुरू होते हैं।

देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से व विष्णु का आह्वान किया जाता है। इस दिन एक ओखली में गेरू से चित्र बनाकर फल, मिठाई, बेर, सिंघाड़े, ऋतुफल और गन्ना रख कर उसे डलिया से ढंक दें। इस दिन रात में घरों के बाहर और पूजा स्थल पर दीये जलाएं। रात के समय भगवान विष्णु की पूजा करे। इसके बाद भगवान को शंख, घंटा-घड़ियाल आदि बजाकर भगवान को उठाएं।

एकादशी व्रत कथा

एक बार भगवान विष्णु से लक्ष्मीजी ने आग्रह के भाव में कहा- हे भगवान! आप दिन-रात जागते हैं, लेकिन एक बार सोते हैं तो फिर लाखों-करोड़ों वर्षों के लिए सो जाते हैं तथा उस समय समस्त चराचर का नाश भी कर डालते हैं इसलिए आप नियम से विश्राम किया कीजिए। आपके ऐसा करने से मुझे भी कुछ समय आराम का मिलेगा। लक्ष्मीजी की बात भगवान को उचित लगी। उन्होंने कहा कि तुम ठीक कहती हो। मेरे जागने से सभी देवों और खासकर तुम्हें कष्ट होता है। तुम्हें मेरी सेवा से वक्त नहीं मिलता इसलिए आज से मैं हर वर्ष चार मास वर्षा ऋतु में शयन किया करूंगा। मेरी यह निद्रा अल्पनिद्रा और प्रलयकालीन महानिद्रा कहलाएगी। यह मेरी अल्पनिद्रा मेरे भक्तों के लिए परम मंगलकारी रहेगी। इस दौरान जो भी भक्त मेरे शयन की भावना कर मेरी सेवा करेंगे, मैं उनके घर तुम्हारे समेत निवास करूंगा।

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Source : Gyan Gun Sagar

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